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ToggleBirju Maharaj Biography in Hindi- बिरजू महाराज का जीवन परिचय Introduction (परिचय)
अगर आप भारतीय शास्त्रीय नृत्य की दुनिया को समझना चाहते हैं, तो Birju Maharaj का नाम सबसे पहले सामने आता है। वे केवल एक महान कथक नर्तक ही नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के ऐसे प्रतीक थे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Kathak के लखनऊ घराने से संबंध रखने वाले बिरजू महाराज ने नृत्य को एक नई ऊँचाई दी। उनकी भाव–भंगिमा, लय और अभिव्यक्ति ने कथक को केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि एक जीवंत कहानी बना दिया।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे Birju Maharaj के जीवन, उनके संघर्ष, उपलब्धियों और भारतीय संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान के बारे में, जिसने उन्हें एक अमर कलाकार बना दिया।
Birju Maharaj Early life (प्रारंभिक जीवन)
Birju Maharaj का जन्म लखनऊ घराने के प्रसिद्ध कथक परिवार में हुआ था। उनके पिता Achhan Maharaj (जगन्नाथ महाराज) स्वयं एक महान कथक गुरु थे, जिन्होंने अपने पुत्र को बचपन से ही नृत्य की शिक्षा देना शुरू कर दिया था।
बिरजू महाराज अपने पिता के साथ विभिन्न स्थानों पर जाया करते थे, जहाँ उनके पिता को प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया जाता था। इसी कारण उन्होंने बहुत कम उम्र में ही कथक की बारीकियों को सीखना शुरू कर दिया था।
उनके चाचा Lachhu Maharaj और Shambhu Maharaj ने भी उन्हें कथक में मार्गदर्शन दिया और उनकी कला को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सन् 1947 में, जब Birju Maharaj ने अपने पिता को खो दिया, तब उनके जीवन में एक कठिन दौर आया। इसके बाद उनका परिवार Mumbai चला गया, जहाँ उन्होंने अपने चाचाओं से कथक की गहराई से शिक्षा जारी रखी।
केवल 13 वर्ष की आयु में ही उन्हें Delhi में संगीत भारती में शिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया, जो उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण था।
अपने जीवन के अंतिम कई दशकों तक Birju Maharaj ने दिल्ली में रहकर नृत्य, संगीत और शिक्षण के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
Birju Maharaj Career (व्यवसाय)
Birju Maharaj ने बहुत कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। मात्र 7 वर्ष की आयु में वे अपने पिता Achhan Maharaj के साथ पूरे भारत में संगीत सम्मेलनों में जाने लगे थे। बंगाल के मन्मथ नाथ घोष समारोह में उनके पहले प्रमुख प्रदर्शन ने उन्हें एक उभरते हुए प्रतिभाशाली नर्तक के रूप में पहचान दिलाई।
समय के साथ उनके एकल नृत्य प्रदर्शन देश-विदेश के प्रमुख संगीत समारोहों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की। संगीत भारती में सफल कार्यकाल के बाद वे Bhartiya Kala Kendra में पढ़ाने लगे और आगे चलकर Kathak Kendra (Sangeet Natak Akademi की इकाई) में शिक्षकों की टीम का नेतृत्व किया। वे कई वर्षों तक वहाँ संकाय प्रमुख रहे और 1998 में 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुए।
Birju Maharaj ने ‘गोवर्धन लीला’, ‘माखन चोरी’, ‘मालती-माधव’, ‘कुमार संभव’ और ‘फाग बहार’ जैसे अनेक प्रसिद्ध नृत्य नाटकों की रचना की। उन्होंने फिल्मों में भी योगदान दिया—
- Satyajit Ray की फिल्म Shatranj Ke Khilari के लिए नृत्य निर्देशन
- Sanjay Leela Bhansali की फिल्म Devdas में गीत कोरियोग्राफी
उन्होंने अपने जीवन में रूस, अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, श्रीलंका आदि अनेक देशों में प्रदर्शन कर भारत का गौरव बढ़ाया। कई बार उन्होंने Rashtrapati Bhavan में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के सम्मान में भी प्रस्तुति दी।
उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Padma Vibhushan से सम्मानित किया। साथ ही Banaras Hindu University और Indira Kala Sangeet Vishwavidyalaya (खैरागढ़ विश्वविद्यालय) ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की।
इस प्रकार, Birju Maharaj ने कथक नृत्य को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया।
Awards
Birju Maharaj को अपने अद्भुत योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए।
उन्हें वर्ष 1986 में भारत सरकार द्वारा देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Padma Vibhushan से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, Government of Madhya Pradesh द्वारा उन्हें कालिदास सम्मान भी प्रदान किया गया, जो कला के क्षेत्र में अत्यंत प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है।
उनके अन्य प्रमुख सम्मानों में—
- Sangeet Natak Akademi पुरस्कार
- सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार
- संगम कला पुरस्कार
- लता मंगेशकर पुरस्कार (2002)
शामिल हैं।
शैक्षणिक क्षेत्र में भी उनके योगदान को मान्यता मिली और Banaras Hindu University तथा Indira Kala Sangeet Vishwavidyalaya ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की।
फिल्मों में उनके योगदान को भी खूब सराहा गया—
- 2012 में Vishwaroopam के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी)
- उसी फिल्म के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार
- 2016 में Bajirao Mastani के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी)
इस प्रकार, Birju Maharaj को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके असाधारण योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त हुआ।
अन्य जानकारी
17 जनवरी 2022 को कार्डियक अरेस्ट के कारण बिरजू महाराज का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के समय, वे दिल्ली में अपने निवास पर अपने परिवार और शिष्यों से घिरे हुए थे |