Gyanvapi Mosque History:जानिये ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास

Gyanvapi Mosque History- ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास

ज्ञानवापी मस्जिद उत्तरप्रदेश, वाराणसी में स्थित एक विवादित मस्जिद है। यह मस्जिद वर्तमान में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है।

ज्ञानवापी मस्जिद को आलमगीर मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है।

ज्ञानवापी मस्जिद इतिहास-History of Gyanvapi Mosque

ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कब और किसने करवाया था इसके स्पष्ट साक्ष्य इतिहास में उपलब्ध नहीं है। परन्तु इतिहास के अनुसार जो जानकारी मिलती है उसके माध्यम से कहा जा सकता है की ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने करवाया था।

वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद जिस काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ जुड़ कर बनी हुई है उस मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम चौथी और पांचवी सताब्दी में राजा चद्रगुप्त द्वितीय ने करवाया था। राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय को विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है।

पुनः मोहम्मद गौरी के शासन काल में काशी विश्वनाथ मंदिर को विध्वंस किया गया था । मोहम्मद गौरी ने अपने राज के दौरान भारत अनेक मंदिरो को क्षतिग्रस्त किया था।

वर्ष 1669 में औरंगजेब ने शासन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर को पूर्णता ध्वस्त कर दिया और उस मंदिर के स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया।

ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण के बाद पुनः वर्ष 1735 से 1778 के मध्य इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने ज्ञानवापी मस्जिद के निकट काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया। अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर की संरचना वर्तमान में भी स्थित है।

पुनः वर्ष 1809 में हिन्दू समुदाय के लोगो द्वारा यह मांग हुई की उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद दे दी जाये क्योंकि यह भगवान् शिव का मंदिर है।

उसके बाद 1810 में वाराणसी के तत्कालीन जिला अधिकारी ने ” वाईस प्रेजिडेंट इन कॉउंसिल ” को एक पत्र लिखा और कहा की ज्ञानवापी मस्जिद सदैव के लिए हिन्दुओ को दे दी जाए , परन्तु इतिहास में यह संभव न हो सका।

ज्ञानवापी मस्जिद का पहला जिक्र 1883 से 1884 के राजस्व दस्तावेजों में जामा मस्जिद ज्ञानवापी के रूप में मिलता है।

वर्ष 1936 में दायर एक मुक़दमे के फैसले के अनुसार वर्ष 1937 में अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद को स्वीकार कर लिया।

इस प्रकार एक हिन्दू मंदिर को नष्ट करके औरंगजेब द्वारा बनाई गई ज्ञानवापी मस्जिद वर्तमान में भी स्थित है।

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