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ToggleKashi Karvat Temple - काशी करवट वाराणसी
वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर स्थित Ratneshwar Mahadev Temple, जिसे काशी करवट मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और अद्भुत मंदिर है। इसे कई लोग मंत्री ऋण महादेव मंदिर के नाम से भी जानते हैं।
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी बनावट है। यह मंदिर लगभग 9 डिग्री तक एक ओर झुका हुआ है, जिसके कारण इसे देखने पर एक अलग ही दृश्य दिखाई देता है। अपने झुके हुए स्वरूप की वजह से इसे कई बार Leaning Tower of Pisa से भी अधिक झुका हुआ बताया जाता है, जो इसे और भी रोचक बना देता है।
गंगा किनारे स्थित होने के कारण यह मंदिर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहाँ आने वाले लोग इस अनोखे मंदिर को देखने के साथ-साथ इसकी तस्वीरें भी लेते हैं। कहा जाता है कि काशी में यदि किसी मंदिर की सबसे अधिक फोटोग्राफी होती है, तो वह यही मंदिर है।
Address Of Kashi Karvat Varanasi- काशी करवट का पता
Nepali Khapra, Govindpura, Varanasi, Uttar Pradesh 221001
Kashi Karvat Story / Kashi Karvat Ki Kahani
Ratneshwar Mahadev Temple से जुड़ी कई लोककथाएँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं, जो इस मंदिर को और भी रहस्यमय बनाती हैं।
एक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण Raja Man Singh के एक सेवक ने अपनी माता रत्ना देवी की स्मृति में कराया था। कहा जाता है कि मंदिर बनकर तैयार होने पर उस सेवक ने गर्व से कहा कि आज उसने अपनी माँ का कर्ज़ चुका दिया है। यह बात सुनकर भगवान शिव क्रोधित हो गए, क्योंकि माना जाता है कि माँ का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। इसी कारण मंदिर एक ओर से धँस गया और झुक गया। इसी वजह से कुछ लोग इस मंदिर को श्रापित भी मानते हैं। मान्यता है कि मानसून के समय जब गंगा का जल स्तर बढ़ जाता है, तब यहाँ नियमित पूजा नहीं की जाती।
एक अन्य कथा के अनुसार, Ahilyabai Holkar की एक सेविका रत्ना बाई ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था और अपने नाम पर इसका नाम रत्नेश्वर महादेव मंदिर रख दिया। जब यह बात रानी अहिल्याबाई को पता चली तो वे नाराज़ हो गईं और कहा जाता है कि उनके श्राप के कारण यह मंदिर झुक गया।
वहीं कुछ लोग इस मंदिर के झुकने का कारण प्राकृतिक बताते हैं। उनके अनुसार, गंगा में आई बाढ़ और घाट की मिट्टी धँसने की वजह से मंदिर एक ओर से नीचे की तरफ झुक गया।
इन्हीं अलग–अलग कथाओं और रहस्यों के कारण यह मंदिर आज भी काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
Architecture Of Kashi Karwat- काशी करवट मंदिर की बनावट
Ratneshwar Mahadev Temple, जिसे काशी करवट मंदिर भी कहा जाता है, लगभग 74 फीट ऊँचा है। इस मंदिर का निर्माण पारंपरिक Nagara architecture शैली में किया गया है, जो उत्तर भारतीय मंदिरों की प्रमुख वास्तुकला मानी जाती है।
यह मंदिर Manikarnika Ghat पर बने अन्य मंदिरों की तुलना में काफी नीचे स्तर पर बनाया गया है और इसका निर्माण भी सीमित स्थान में हुआ है। गंगा के बिल्कुल करीब होने के कारण इसके गर्भगृह में अक्सर पानी भर जाता है।
विशेषकर मानसून के समय जब गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है, तब पानी मंदिर के अंदर तक पहुँच जाता है। कई बार तेज बारिश और बाढ़ की स्थिति में पानी मंदिर के शिखर के काफी करीब तक भी पहुँच जाता है, जिससे यह मंदिर और भी अनोखा दिखाई देता है।
A Temple Without Worship- एक मंदिर जिसकी पूजा नहीं होती
Ratneshwar Mahadev Temple अन्य मंदिरों से न केवल अपने झुके हुए स्वरूप के कारण अलग दिखाई देता है, बल्कि यहाँ नियमित पूजा–पाठ न होने के कारण भी यह विशेष माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर को श्रापित माना जाता है, इसलिए यहाँ सामान्य मंदिरों की तरह पूजा–अर्चना नहीं की जाती।
कहा जाता है कि इसी कारण मंदिर के भीतर किसी देवता की मूर्ति भी स्थापित नहीं की गई है। यही वजह है कि काशी के अन्य शिव मंदिरों की तुलना में यह मंदिर अपने रहस्य और अलग पहचान के लिए जाना जाता है।
Conclusion
इस प्रकार Ratneshwar Mahadev Temple से जुड़ी यह जानकारी काफी रोचक है। यह मंदिर न केवल अपने झुके हुए स्वरूप के कारण प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ नियमित पूजा न होने और किसी देवता की प्रतिमा स्थापित न होने के कारण भी अन्य मंदिरों से अलग माना जाता है।
गंगा के किनारे स्थित होने के कारण यह मंदिर अक्सर पानी में डूबा रहता है, फिर भी इतने वर्षों से इसका ढांचा लगभग वैसा ही बना हुआ है। यही विशेषता इसे काशी के सबसे अनोखे और चर्चित मंदिरों में से एक बनाती है।
उम्मीद है कि इस मंदिर से जुड़ी यह जानकारी आपको पसंद आई होगी और आपको इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हुई होगी।