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ToggleSankata Devi Mandir /Sankatha Temple Varanasi- संकटा देवी का मंदिर वाराणसी
Varanasi, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, अपनी पवित्रता और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है Sankata Devi Temple, जो Manikarnika Ghat से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह मंदिर देवी संकटा को समर्पित है, जिन्हें संकटों को दूर करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि देवी सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य सुनती हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करती हैं। स्थानीय विश्वास के अनुसार Sankata Devi Temple देवी संकटा का प्रमुख और विशेष मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि यदि कोई भक्त शुक्रवार के दिन यहाँ चुनरी और नारियल अर्पित कर सच्चे मन से मनोकामना करता है, तो उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है।
Architecture Of Sankata Devi Temple | संकटा देवी मंदिर का बनावट
Sankata Devi Temple के इतिहास से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार 18वीं सदी के अंत में Sankata Ghat का निर्माण Maharaja of Baroda द्वारा कराया गया था। उसी समय संकटा देवी के इस मंदिर का भी निर्माण करवाया गया। बाद में घाट को एक पंडित की विधवा पत्नी ने पक्का बनवाया, जिससे यह स्थान और अधिक व्यवस्थित हो गया।
इस मंदिर की वास्तुकला काशी के अन्य मंदिरों से कुछ अलग दिखाई देती है। मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार बना हुआ है और उसके अंदर प्रवेश करते ही एक बड़ा आँगन दिखाई देता है। आँगन के बीचों–बीच एक पुराना पीपल का पेड़ है, जिसके चारों ओर चबूतरा बना हुआ है।
आँगन के चारों तरफ बरामदा बना हुआ है, जहाँ अक्सर हवन, पूजा–पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। इसी आँगन के भीतर एक बड़ा हॉल भी है, जिसमें Sankata Devi की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जहाँ श्रद्धालु श्रद्धा से पूजा–अर्चना करते हैं।
Address Of Sankata Devi Temple | संकटा देवी मंदिर का पता
संकटा मंदिर, CK 21/20, शितला गली, गावासितोला, गोविंदपुरा, उत्तर प्रदेश, 221001.
Timing Of Sankata Devi Temple | संकटा देवी मंदिर का समय
संकटा देवी का मंदिर सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक खुला रहता है, फिर 3 बजे से रात 12 बजे तक खुला रहता है. और माँ की आरती का समय सुबह 6:30 बजे और रात को 10 बजे है.
History Of Sankata Devi Temple | संकटा देवी मंदिर का इतिहास
ढ़ाती हैं। एक मान्यता के अनुसार, जब Sati ने आत्मदाह कर लिया था, तब भगवान Shiva अत्यंत व्याकुल हो गए थे। उस समय उन्होंने Sankata Devi की पूजा–अर्चना की। कहा जाता है कि माता संकटा उनकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उनकी व्याकुलता दूर कर दी। बाद में भगवान शिव को पुनः Parvati का साथ प्राप्त हुआ।
एक दूसरी मान्यता के अनुसार, जब Pandavas काशी आए थे, तब उन्होंने यहाँ माता संकटा देवी की प्रतिमा स्थापित की। बताया जाता है कि पाँचों पांडवों ने एक पैर पर खड़े होकर बिना जल और अन्न ग्रहण किए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता संकटा प्रकट हुईं और उनसे वरदान माँगने को कहा। तब पांडवों को माता ने लक्ष्मी, वैभव और सभी संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि इसी आशीर्वाद के कारण बाद में Mahabharata के युद्ध में पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त की। कहा जाता है कि इसके बाद यहाँ Sankata Devi Temple का निर्माण कराया गया।
Conclusion
इस प्रकार Sankata Devi Temple से जुड़ी ये कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ थीं, जिनमें Sankata Devi Temple का पता, वास्तुकला और इतिहास के बारे में बताया गया है। काशी के प्रमुख और आस्था से जुड़े मंदिरों में इस मंदिर का विशेष स्थान माना जाता है, जहाँ श्रद्धालु अपने संकटों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं।
उम्मीद है कि आपको Sankata Devi Temple के बारे में दी गई यह जानकारी पसंद आई होगी और इससे आपको इस पवित्र मंदिर के बारे में काफी कुछ जानने को मिला होगा। यदि आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ अवश्य साझा करें।