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Toggleसंकट मोचन मंदिर, वाराणसी
Sankat Mochan Hanuman Temple, Varanasi के प्रसिद्ध और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिरों में से एक है। मंदिर वह पवित्र स्थान होता है जहाँ कोई भी भक्त अपने आराध्य भगवान के सामने अपनी प्रार्थना और विनय प्रकट कर सकता है।
हिंदू धर्म में लगभग 33 कोटि देवी–देवताओं का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार Sita ने Hanuman को अजर–अमर होने का वरदान दिया था। इसी कारण कई किवदंतियों में यह माना जाता है कि हनुमान जी आज भी कलयुग में पृथ्वी पर विराजमान हैं और अपने भक्तों के संकटों को दूर करते हैं।
संकट मोचन मंदिर के बारे में (About Sankat Mochan Mandir)
Sankat Mochan Hanuman Temple भगवान Hanuman के प्रमुख मंदिरों में से एक है, जो Varanasi, Uttar Pradesh में स्थित है। यह पवित्र मंदिर Banaras Hindu University के पास, Durga Temple Varanasi और Kashi Vishwanath Temple जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
मंदिर की प्रसिद्धि दूर–दूर तक फैली हुई है और यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। वर्तमान मंदिर के विकास और व्यवस्था में Madan Mohan Malaviya का भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है, जिन्होंने 20वीं सदी के आरंभ में इसके विकास में सहयोग दिया।
यह मंदिर विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भीड़ से भरा रहता है, क्योंकि इन दिनों भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
संकट मोचन मंदिर का इतिहास (History of Sankat Mochan Mandir)
Sankat Mochan Hanuman Temple को बहुत ही प्राचीन और श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महान संत और कवि Tulsidas ने की थी। कहा जाता है कि इसी स्थान पर गोस्वामी तुलसीदास जी को पहली बार Hanuman के दर्शन स्वप्न में हुए थे।
कहा जाता है कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में Tulsidas अपने हाथ (भुजा) के असहनीय दर्द से बहुत पीड़ित थे। तब उन्होंने इसी मंदिर में भगवान हनुमान के संकट मोचन स्वरूप का ध्यान करते हुए प्रसिद्ध रचना Hanuman Bahuk की रचना की थी।
इतिहास में इस मंदिर से जुड़ी एक दुखद घटना भी दर्ज है। 7 मार्च 2006 को Varanasi में हुए 2006 Varanasi bombings के दौरान तीन बम विस्फोट हुए थे, जिनमें से एक विस्फोट मंदिर परिसर में हुआ था। उस समय मंदिर में संकट मोचन आरती चल रही थी। इस हादसे में लगभग 10 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही। विस्फोट के बाद वहाँ मौजूद लोगों ने एक–दूसरे की मदद की और अगले ही दिन बड़ी संख्या में भक्तों के साथ मंदिर में पूजा–अर्चना फिर से शुरू हो गई।
संकट मोचन मंदिर में दर्शन करने का समय (Darsan Timing)
महाप्रभु का यह धाम सुबह 5 बजे भक्तो के लिए खुल जाता हैं, और रात के10 बजे तक भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर सकते हैं। दोपहर के 11:30 से 3 बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
हनुमान जी के इस मंदिर में दिन में दो बार आरती होती हैं प्रातः आरती 4 बजे और संध्या आरती रात के 9 बजे होती हैं।
संकट मोचन मंदिर क्यों प्रसिद्ध है (Why sankat mochan is famous)
इस पौराणिक की मंदिर एक अद्भुत विशेषता यह है कि भगवान हनुमान की मूर्ति की स्थापना इस प्रकार हुई हैं कि वह भगवान राम की ही ओर देख रहे है, एवं श्री रामचन्द्र के ठीक सीध मे संकटमोचन महाराज का विग्रह हैं, जिनकी वे निः स्वार्थ भाव से सेवा करते प्रतीत होते हैं। भगवान हनुमान जी की मूर्ति की विशेषता यह भी है कि यह मूर्ति मिट्टी की बनी है। परंपराओ की माने तो कहा जाता है कि मंदिर मे नियमित रूप से आगन्तुकों पर भगवान संकट मोचन की विशेष कृपा होती है।
यहाँ पर हुए आतंकी हमलो के बाद भी लोगों की अटूट श्रद्धा मंदिर के प्रति आज भी बनी हुई है।
संकट मोचन मंदिर कैसे पहुंचे (How to reach at Sankat Mochan Mandir)
संकट मोचन मंदिर जाने के लिए आप काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पास वाले दुर्गा मंदिर और नए विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग पर जाना पड़ेगा। आप यहाँ जाने के लिए निजी वाहन के साथ साथ टैक्सी और ऑटो की भी मदद ले सकते हैं। यह मंदिर वाराणसी रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टेशन से 8 Km, और अस्सी घाट से 2 Km की दूरी पर स्थित है।
संकट मोचन मंदिर में बन्दर क्यों पाए जाते है (Sankat mochan temple Monkey)
हनुमान स्वरूप में भगवान महादेव ने एक वानर की योनि मे जन्म लिया था। इस मंदिर के आस पास बहुत संख्या में बंदर पाए जाते हैं। ऐसी मनायताएँ हैं कि ये बंदर हनुमान जी की सेना हैं जिनके साथ प्रभु यहाँ निवास करते हैं। बहुत ज्यादा बंदर पाए जाने के कारण इस चमत्कारी मंदिर को “वानर मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है।
संकट मोचन मंदिर का प्रसाद
संकट मोचन का अर्थ होता है, ‘कष्टों को दूर करने वाला’। हनुमान जी इस मंदिर में आये अपने सभी भक्तो के कष्ट दूर कर देते हैं इसलिए इस मंदिर को संकट मोचन मंदिर कहते हैं
भक्त महाप्रभु को प्रसन्न करने के लिए भक्त लाल पेड़ा देसी घी के लड्डू, सिंदूर और तेल का तिलक, श्री हनुमान चालीसा, और तुलसी और फूलो की माला अर्पण करते हैं। जिन्हें भगवान का भोग लग जाने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित कर दिया जाता हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार हनुमान जी अपने भक्त के कुंडली में पड़ने वाले मंगल और शनि ग्रह या अन्य किसी भी ग्रह के बुरे प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। हर मंगलवार और शनिवार, हजारो की संख्या में मंदिर के बाहर हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के लिए कतार मे खड़े रहते हैं।
Sankat Mochan temple inside
मंदिर के अंदर का वातावरण अत्यंत ही शांत और आध्यात्मिकता से भरा हुआ रहता हैं।
मंदिर के पवित्र परिसर मे एक अति प्राचीन कुआँ भी हैं, जो संत तुलसी दास के काल का बताया जाता हैं। श्रद्धालु इस कुए का शीतल जल ग्रहण करते हैं।
यहाँ पर एक विशाल क्षेत्र में तुलसी एवं अन्य वृक्षों को लगाया गया हैं, जिसके आस पास साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता हैं।
हनुमान जयंती पर यहाँ एक विशाल शोभा यात्रा और अनेक भव्य कार्यक्रमो का आयोजन किया जाता है। आप जब भी वाराणसी जाए संकट मोचन हनुमान जी के दर्शन करना ना भूले।