Janki Ghat Varanasi: सुरसंड की रानी द्वारा माता सीता को समर्पित घाट

जानकी घाट वाराणसी के प्राचीन और प्रमुख घाटों में से एक है। यह घाट शहर के सबसे लंबे घाटों में गिना जाता है, जो अपनी विस्तृत संरचना के लिए जाना जाता है।

जानकी घाट अपनी सुंदरता और शांत वातावरण के कारण विशेष पहचान रखता है। यहाँ आने वाले लोग गंगा तट की शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक माहौल का आनंद लेने के लिए पहुँचते हैं, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Address: जानकी घाट, पंडित मदन मोहन मालवीय रोड़, वाराणसी, उत्तरप्रदेश में स्थित है। 

जानकी घाट इतिहास

जानकी घाट प्राचीन समय में कच्छ भूमि या नागंबर घाट के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1870 में सुरसंड की रानी कुंवर द्वारा इस घाट का निर्माण कराया गया।

रानी कुंवर माता सीता (जानकी) की परम भक्त थीं। अपनी आस्था के कारण उन्होंने इस घाट को माता सीता को समर्पित कर दिया। तभी से यह स्थान जानकी घाट के नाम से प्रसिद्ध हो गया और आज भी अपनी धार्मिक महत्ता तथा ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है।

जानकी घाट के निकट मुख्य आकर्षण

जानकी घाट के निकट घूमने के लिए अनेक स्थान है। यह सभी स्थान जानकी घाट के निकट आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

  • भदैनी घाट
  • विष्णु मंदिर
  • शिव मंदिर

जानकी घाट घूमने का उत्तम समय

जानकी घाट घूमने के लिए आप वर्ष भर किसी भी समय सकते हैं। यह घाट हर मौसम में अपनी शांत और सुंदर वातावरण के लिए जाना जाता है।

हालांकि, यहाँ आने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान माना जाता है। इस समय गंगा तट का दृश्य बेहद मनमोहक होता है, जो मन को शांति और सुकून देता है। इसके अलावा, नौका विहार के लिए भी यह घाट एक अच्छा विकल्प है, जहाँ से आप गंगा के सुंदर दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे जानकी घाट

बस द्वारा, चौधरी चरण सिंह बस अड्डे से जानकी घाट पंहुचा जा सकता है। चौधरी चरण सिंह बस अड्डे से जानकी घाट की दूरी 5 किलोमीटर है। 

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