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कपाल मोचन तीर्थ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। यह तालाब कज्जाकपुरा से पुराना पुल जाने वाले रास्ते पर स्थित है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व:
कपाल मोचन तीर्थ की कथा बेहद अद्भुत है। कहा जाता है कि जब काल भैरव भगवान ब्रह्मा का शीश लेकर घूमते रहे, तब भगवान शिव के आशीर्वाद से भैरव काशी के उत्तर दिशा में पहुँचे। इसी दौरान ब्रह्मा जी का शीश भैरव के हाथ से गिरा और जिस स्थान पर गिरा, वहां धारा कुंड बना जिसे कपाल मोचन तीर्थ के नाम से जाना गया।
धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व:
- यहाँ स्नान करने से ब्रम्ह दोष से मुक्ति मिलती है।
- कपाल भैरव तीर्थ के कुंड में स्नान करने से महिलाओं को बांझपन से मुक्ति मिलती है।
- चर्मरोग से निजात पाने के लिए भी लोग इस कुंड के जल का उपयोग करते हैं।
- यहाँ स्नान करके लाट भैरव का दर्शन–पूजन और दान करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
- पिंडदान, गंगा स्नान, पूजा, जाप, हवन और चंद्रयान व्रत का भी इस तीर्थ में महत्व है।
जीर्णोद्धार और वर्तमान स्थिति:
- कुंड का जीर्णोद्धार 18वीं शताब्दी में रानी भवानी ने कराया था, जिसमें पक्की सीढ़ियाँ, घाट और सुरक्षित दीवार शामिल थे।
- वर्तमान में कपाल मोचन एवं लाट भैरव कुंड समिति द्वारा कुंड की सफाई और रखरखाव किया जा रहा है।
कपाल मोचन तीर्थ वाराणसी का एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
कपाल मोचन तालाब कुंड कहा स्थित है -
कपाल मोचन तालाब कुंड वाराणसी, उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह कुंड कज्जाकपुरा से पुराने पुल जाने वाले रास्ते पर पड़ता है और वाराणसी के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।
कपाल मोचन तालाब कुंड कैसे पहुंचे -
वाराणसी बस स्टैंड से इसकी दुरी लगभग 4km है, आप पंडित दीनदयाल रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग से भी जा सकते है या काशी विस्वनाथ मंदिर के पास से भी रास्ता है।