महा शिवरात्रि उत्सव, वाराणसी- Mahashivratri in Varanasi

महा शिवरात्रि उत्सव भगवान् शिव को समर्पित उत्सवों में से एक मुख्य उत्सव है। सभी हिन्दू धर्म के लोग इस त्यौहार को बड़े धूमधाम के साथ मनाते है। भगवान् शिव की नगरी वाराणसी में महा शिवरात्रि उत्सव के रंग कुछ अलग ही होते है। वाराणसी में शिवरात्रि को बड़े हर्ष और उल्ल्हास के साथ मनाया जाता है।

कब मनाया जाता है महा शिवरात्रि उत्सव-When was celebrated Mahshivratri

 महा शिवरात्रि उत्सव फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष के 14 वे दिन मनाया जाता है।

क्यों मानते है शिव रात्रि उत्सव-Why celebrate Mahashivratri

हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार महा शिवरात्रि उत्सव भगवान् शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव है। इस दिन भगवान् शिव माता पार्वती के साथ विवाह बंधन में बंधे थे।

भगवान् शिव पुरुष का प्रतिक है जबकि माता पार्वती प्रकृति का प्रतीक है। महा शिवरात्रि उत्सव की रात भगवान् शिव तांडव भी करते है।

हिन्दू धर्म में महिलाये अच्छे पति की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत करती है। महिलाये माता पार्वती से वर मांगती है की उन्हें भी भगवान् शिव जैसा वर दें।

महा शिवरात्रि उत्सव, वाराणसी-Mahashivratri In Varanasi Detail

वाराणसी में महा शिवरात्रि उत्सव बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ बाबा महाकाल का धाम है। जो की भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ भगवान् शिव का सबसे  प्राचीन और पवित्र  ज्योतिर्लिंग  है।

यही कारण है की यहाँ शिवरात्रि बड़े धूम धाम के साथ मनाई जाती है।

महा शिवरात्रि उत्सव के दिन वाराणसी के मंदिरो में भगवान् शिव का हर 3 घंटे में अभिषेक किया जाता है। भगवान् शिव का अभिषेक दूध, दही और शहद से किया जाता है। इसके बाद भगवान् शिव को फल और अन्य मेवों से सजाया जाता है।

महा शिवरात्रि उत्सव पर वाराणसी में सबसे ज्यादा भीड़ काशी विश्वनाथ मंदिर में होती है। यहाँ सुबह से ही लोग गंगा स्नान करने के बाद मंदिर आना शुरू कर देते है।

वाराणसी में महा शिवरात्रि के दिन शिव महोत्सव आयोजित होता है। शिवमहोत्सव में भगवान् शिव के विवाह की रस्मे दिखाई जाती है और भगवान् शिव रूप का वर्णन होता है। भक्तजन पूरी रात जाग कर शिव विवाह का उत्सव मानते है।

वाराणसी में शिवरात्रि के उत्सव पर ठंडाई और भांग पीने का भी चलन है।  इसे भक्त भगवान् शिव के प्रसाद रूप में लेते है। वाराणसी में जगह जगह पर ठंडाई का प्रसाद रूप में वितरण होता है।

वाराणसी में महा शिवरात्रि उत्सव पर भगवान् शिव को 6 वस्तुएं अर्पित करने का प्रावधान है और प्रत्येक वस्तु के अपने अर्थ है जैसे –

बेल पत्र – वाराणसी में मान्यता है की सदैव स्वस्थ रहना है तो भगवान् शिव को बेल पत्र जरूर अर्पित करे।

सिन्दूर – भगवान् शिव की शुद्धता बनाये रखने के लिए सिन्दूर का अर्पण जरूर करे।

चावल और बेर – वाराणसी के लोग कहते है की लम्बे जीवन की कामना है तो भोले बाबा पर चावल और बेर का अर्पण जरूर करे।

धूप व् दीप – मन शांत करने के लिए और और भगवान् से प्रसिद्धि पाने के लिए धूप दीप का दान जरूर करे।

दिया जलना – ज्ञान की प्राप्ति के लिए भगवान् शिव के सामने दिया जरूर जलाये।

पान पत्ता – सांसारिक सुख प्राप्त करने के लिए भगवान् शिव को पान पत्ता जरूर अर्पण करे।

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