Sarnath Archaeological Museum: सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय

सारनाथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल है, जहाँ गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यह स्थान उनके जीवन और बौद्ध धर्म के इतिहास में विशेष महत्व रखता है।

जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया, तब उन्होंने इसके प्रचार-प्रसार के लिए यहाँ कई स्तूप, स्तंभ और प्रतिमाओं का निर्माण करवाया। इन ऐतिहासिक धरोहरों के अवशेष आज सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं।

यह संग्रहालय भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरातात्विक संग्रहालयों में से एक है। इसका निर्माण वर्ष 1904 में सर जॉन मार्शल द्वारा करवाया गया था, जो बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आ गया।

इस संग्रहालय में लगभग 6,800 से अधिक मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ संग्रहित हैं, जो प्राचीन भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं।

Sarnath Museum Address - सारनाथ संग्रहालय का पता

सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय सारनाथ स्टेशन रोड, सारनाथ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है।

यह स्थान आसानी से पहुँचा जा सकता है और सारनाथ के प्रमुख पर्यटन स्थलों के पास ही स्थित है, जिससे पर्यटकों के लिए यहाँ आना सुविधाजनक रहता है।

Sarnath museum ticket price - सारनाथ संग्रहालय टिकट की कीमत

सारनाथ अर्कोलॉजिकल् Museum प्रवेश के लिए आपको टिकेट लेने की ज़रूरत रहती है जिसकी फीस बहुत मामूली सिर्फ 5 रुपए है. जबकि विदेशियों के 100 रुपए है, वहीं SAARC और BIMSTEC के यह फीस 20 रुपए है. और 15 साल से कम आयु वालो के लिए यह फ्री है.

Sarnath museum timings - सारनाथ संग्रहालय का समय

अर्कोलॉजिकल् Museum और deer पार्क हफ़्ते के सातों दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे खुला रहता है.

Sarnath museum online ticket booking - सारनाथ संग्रहालय ऑनलाइन टिकट बुकिंग

आप टिकेट ऑन लाइन भी बुक करा सकते हैं, जोकि सारनाथ Museum की ऑफिशियल site http://www.sarnathmuseumasi.org पर online ticket पर जाकर और साधारण जानकारी देकर बुक करा सकते हैं, विदेशी पर्यटक के लिए 50 रुपए और SAARC और BIMSTEC के लिए 20 रुपए है.

Sarnath museum ashoka stambh - सारनाथ संग्रहालय अशोक स्तम्भ

अशोक स्तंभ सारनाथ भारत के विभिन्न हिस्सों में बने सम्राट सम्राट अशोक के स्तंभों में सबसे प्रसिद्ध है। लगभग 17 मीटर ऊँचा यह स्तंभ भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है। इसे 26 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया, जो शांति, शक्ति और धर्म की अखंडता का प्रतीक है। इसी स्तंभ से लिया गया अशोक चक्र आज हमारे राष्ट्रीय ध्वज का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अशोक स्तंभ मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित है। इसका आधार उल्टे कमल के फूल के रूप में बना है, जो बौद्ध धर्म और जीवन के प्रतीकात्मक अर्थ को दर्शाता है। इसके ऊपर एक गोलाकार भाग (एबेकस) है, जिस पर चार जानवर,घोड़ा, बैल, हाथी और सिंह,की सुंदर नक्काशी की गई है, जो चारों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन जानवरों के बीच 24 तीलियों वाले चक्र बने हैं, जो जीवन के निरंतर चलने वाले चक्र को दर्शाते हैं।

सबसे ऊपर चार सिंह एक-दूसरे की पीठ से जुड़े हुए चारों दिशाओं की ओर मुख किए खड़े हैं। देखने में ये तीन प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में इनकी संख्या चार है। इन सभी भागों को मिलाकर “Lion Capital of Ashoka” कहा जाता है, जो भारतीय शिल्पकला और प्रतीकात्मकता का एक उत्कृष्ट नमूना है।

What to see inside the Sarnath Museum - संग्रहालय के अंदर क्या क्या देखने को मिलता है

सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय में विभिन्न गैलरियाँ हैं, जहाँ 5वीं से 12वीं शताब्दी तक की ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहरें प्रदर्शित की गई हैं। यह संग्रहालय प्राचीन भारतीय कला और शिल्पकला को करीब से समझने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।

संग्रहालय में प्रवेश करते ही “Lion Capital of Ashoka” (सिंह शीर्ष), बोधिसत्व की मूर्ति, एक विशाल छत्र और महत्वपूर्ण शिलालेख देखने को मिलते हैं। एक शिलालेख में गौतम बुद्ध के पाँच शिष्यों के चारों दिशाओं में जाने का उल्लेख भी मिलता है।

प्रवेश द्वार के दाहिने ओर बुद्ध की अभय मुद्रा में सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं। इसके अलावा तारा देवी की एक प्राचीन मूर्ति भी है, जिसके दोनों हाथ टूटे हुए हैं। यहाँ एक टूटा हुआ छत्र भी रखा है, जिस पर डियर पार्क में दिए गए बुद्ध के उपदेश से संबंधित शिलालेख अंकित है।

आगे की गैलरियों में गुप्तकालीन प्रतिमाएँ विशेष आकर्षण का केंद्र हैं, जिनमें बुद्ध को अपने पाँच शिष्यों को उपदेश देते हुए दर्शाया गया है। साथ ही, बुद्ध के जीवन की विभिन्न घटनाओं को दर्शाने वाली मूर्तियाँ भी यहाँ प्रदर्शित हैं, जो गुप्तकाल की उत्कृष्ट कला को दर्शाती हैं।

संग्रहालय में 1990 में बर्मी मंदिर के पास हुई खुदाई से प्राप्त सोने की वस्तुएँ भी रखी गई हैं। इसके अलावा, प्रवेश द्वार के दोनों ओर बने बरामदों में स्थापत्य के कई महत्वपूर्ण अवशेष. जैसे लिंटल्स, फेस स्टोन, डोर जाम और पेडिमेंट,प्रदर्शित किए गए हैं।

यह संग्रहालय पुरातत्व और प्राचीन कारीगरी का अनमोल खजाना है, जो आपको सदियों पुरानी भारतीय कला और संस्कृति का जीवंत अनुभव कराता है।

Conclusion

तो यह थी Sarnath archaeological museum को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे Sarnath Museum Address, sarnath museum ticket price, sarnath museum timings उम्मीद करता हूँ आपको हमारी ये पोस्ट पसंद आयी होगी. अगर आपके मन में भी “Sarnath archaeological museum ” से संबधित कोई भी सवाल है। तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके कमेंट का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।

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