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तुलसी घाट वाराणसी में गंगा नदी के तट पर स्थित प्रमुख और प्रसिद्ध घाटों में से एक है। प्राचीन समय में इसे लोलार्क घाट के नाम से भी जाना जाता था।
गंगा नदी में नाव की सैर के लिए तुलसी घाट एक उत्कृष्ट स्थान माना जाता है। विशेष रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ नाव यात्रा करना अत्यंत मनमोहक और यादगार अनुभव प्रदान करता है।
यह घाट अस्सी रोड, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में स्थित है और शहर के प्रमुख स्थानों में आसानी से पहुँचा जा सकता है।
तुलसी घाट इतिहास
तुलसी घाट वाराणसी के प्राचीन और महत्वपूर्ण घाटों में से एक है। इस घाट का नाम महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम पर रखा गया है। माना जाता है कि रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना के दौरान तुलसीदास जी इसी स्थान पर निवास करते थे, जिससे इस घाट का नाम “तुलसी घाट” पड़ा।
वर्ष 1941 में बलदेव दास बिड़ला द्वारा इस घाट का पक्कीकरण कराया गया, जिसके बाद इसकी संरचना और अधिक सुदृढ़ और व्यवस्थित हो गई।
तुलसी घाट के निकट मुख्य आकर्षण
तुलसी घाट के निकट घूमने के लिए अनेक स्थान है। यह सभी स्थान तुलसी घाट के निकट आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
- तुलसी मानस मंदिर
- केदारेश्वर मंदिर
- आदि केशव घाट
- त्रिदेव मंदिर
- लक्ष्मी नारायण मंदिर
- नेपाली मंदिर
तुलसी घाट घूमने का उत्तम समय
तुलसी घाट की यात्रा वर्ष भर किसी भी समय की जा सकती है। हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर यहाँ का माहौल और भी आकर्षक हो जाता है।
लोलार्क षष्ठी, कार्तिक माह, कृष्ण लीला और नाग नथैया उत्सव जैसे अवसरों पर घाट पर विशेष रौनक देखने को मिलती है। इन दिनों धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिससे यहाँ घूमने का अनुभव और भी यादगार बन जाता है।
कैसे पहुंचे तुलसी घाट
बस द्वारा, चौधरी चरण सिंह बस अड्डे से तुलसी घाट पंहुचा जा सकता है। चौधरी चरण सिंह बस अड्डे से तुलसी घाट की दूरी 6 किलोमीटर है।