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हरिश्चंद्र घाट वाराणसी के प्रमुख और प्राचीन घाटों में से एक है, जिसका धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा माना जाता है। वाराणसी, जिसे प्राचीन ग्रंथों में काशी के नाम से जाना गया है, गंगा तट पर बसी विश्व की सबसे प्राचीन नगरी मानी जाती है।
गंगा के तट पर स्थित प्रत्येक घाट का अपना अलग महत्व है, और इन्हीं में हरिश्चंद्र घाट विशेष रूप से अंतिम संस्कार के लिए प्रसिद्ध है। वाराणसी में मुख्यतः दो प्रमुख श्मशान घाट माने जाते हैं—मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट। मान्यता है कि हरिश्चंद्र घाट, मणिकर्णिका घाट से भी अधिक प्राचीन है।
इस घाट का नाम सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के नाम पर पड़ा है, जो अपनी सत्यनिष्ठा और धर्मपालन के लिए प्रसिद्ध थे। पौराणिक कथा के अनुसार, उनकी सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेने के लिए देवताओं ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में डाल दिया। परिस्थितियों के चलते उन्हें अपना राज्य त्यागना पड़ा और अंततः काशी में आकर डोम राजा के यहाँ कार्य करना पड़ा।
यहीं हरिश्चंद्र घाट पर वे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों से कर (शुल्क) लेने का कार्य करते थे। कथा के अनुसार, जब उनके अपने पुत्र की मृत्यु हुई और उनकी पत्नी तारामती उसका अंतिम संस्कार कराने पहुँचीं, तब भी उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कर मांगा। उनकी अडिग सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर देवताओं ने प्रकट होकर उनकी परीक्षा पूर्ण होने की घोषणा की और उन्हें उनका राज्य व पुत्र वापस प्रदान किया।
इसी कारण यह घाट सत्य, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। आज भी यहाँ राजा हरिश्चंद्र, रानी तारामती और उनके पुत्र रोहिताश्व से संबंधित मंदिर स्थित हैं। साथ ही, यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जिसे तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
हरिश्चंद्र घाट तक कैसे पहुंचे ?(How To Reach Harishchandra Ghat)
हरिश्चंद्र घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर और Banaras Hindu University (बीएचयू) से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह घाट शहर के प्रमुख स्थानों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
यहाँ पहुँचने के लिए आप साझा ऑटो–रिक्शा, टैक्सी या निजी वाहन का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, गंगा के अन्य घाटों से नाव द्वारा भी यहाँ तक पहुँचा जा सकता है—विशेषकर तुलसी घाट तक नाव से आकर आगे पैदल पहुँचना एक अच्छा विकल्प है।
रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डा और बस स्टैंड से भी यह घाट आसानी से पहुँचा जा सकता है, जिससे यात्रियों के लिए यहाँ आना काफी सुविधाजनक रहता है।